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दिवालियापन मामलों के लिए एनसीएलटी में अलग बेंच बनाने का सुझाव
संसदीय पैनल ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण में दिवालियापन संबंधी मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए समर्पित बेंच स्थापित करने की सिफारिश की है। यह कदम कंपनी कानून के तहत अन्य महत्वपूर्ण मामलों को प्रभावित होने से बचाने के लिए जरूरी माना गया है।
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संसद की एक स्थायी समिति ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में दिवालियापन के मामलों के लिए समर्पित बेंच या विभाग स्थापित करने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य इन मामलों के तेजी से निपटान और न्यायाधिकरण द्वारा कंपनी कानून के तहत अन्य मामलों को समान महत्व देना सुनिश्चित करना है।
वर्तमान में एनसीएलटी के पास मुख्य बेंच और नई दिल्ली बेंच के अलावा इलाहाबाद, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, कटक, हैदराबाद, इंदौर, कोलकाता, कोच्चि और मुंबई में बेंच हैं। समिति की सिफारिशें कर्मचारी, जनशिकायत, कानून एवं न्याय संबंधी संसद की स्थायी समिति द्वारा तैयार रिपोर्ट का हिस्सा हैं।
इस महीने की शुरुआत में संसद में प्रस्तुत की गई 'देश की न्यायाधिकरण प्रणाली के कामकाज की समीक्षा' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि दिवालियापन कानून के तहत न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र में लगातार वृद्धि कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत इसकी समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को कमजोर नहीं करना चाहिए।
इन जिम्मेदारियों में विलय और समामेलन से संबंधित मामले, कॉर्पोरेट प्रशासन और शेयरधारकों के अधिकारों की सुरक्षा शामिल है। समिति का मानना है कि समर्पित बेंच की स्थापना से न्यायाधिकरण दोनों क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकेगा।