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राज का आह्वान: संवैधानिक मार्ग से हो शासन परिवर्तन, नेपाल-बांग्लादेश जैसा नहीं
अभिनेता और राजनीतिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने शासन परिवर्तन की मांग का समर्थन किया है, लेकिन जोर देते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक तरीकों से होना चाहिए। उन्होंने पड़ोसी देशों में हुए अस्थिर उथल-पुथल से भारत को अलग रखने की वकालत की है।
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राजनीतिक प्रचारक प्रकाश राज ने बुधवार को स्पष्ट किया कि वर्तमान सरकार के विरुद्ध जनांदोलन चुनाव और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से ही आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश में हुए राजनीतिक परिवर्तन का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि भारत को उस मार्ग पर नहीं जाना चाहिए।
राज के अनुसार, भारतीय लोकतंत्र की ताकत इसकी संवैधानिक व्यवस्था में निहित है। उन्होंने 2029 के आम चुनाव तक राजनीतिक लड़ाई को संवैधानिक सीमा के भीतर रखने पर जोर दिया। उनका मत है कि परिवर्तन के लिए वोट और चुनाव प्रक्रिया ही सबसे वैध साधन हैं।
दिल्ली में आयोजित होने वाले तिरंगा मार्च से पहले नागरिक न्याय पक्ष (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपक की हिरासत को लेकर भी राज ने सवाल उठाए। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रियाओं के सार्वभौमिक मानदंडों की रक्षा की अपील की।