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भारत 2030 तक 100 गीगावाट पवन ऊर्जा लक्ष्य हासिल कर सकता है: सुजलॉन
सुजलॉन ग्रुप के सह-संस्थापक गिरीश तांती के अनुसार भारत अपने 100 गीगावाट पवन ऊर्जा लक्ष्य को 2030 तक हासिल कर सकता है, बशर्ते बिजली ग्रिड के विस्तार में तेजी आए और परियोजना नीलामी का क्रम निरंतर बना रहे।
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भारत के 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य में पवन ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्थान है। हैम्बर्ग में विंडएनर्जी 2026 सम्मेलन में पीटीआई से बात करते हुए तांती ने कहा कि देश में नवीकरणीय ऊर्जा विकास के लिए सबसे बड़ी बाधा ग्रिड की तैयारी है।
तांती की मानें तो बिजली संचरण नेटवर्क के विकास में लगभग पांच साल का समय लगता है, जो परंपरागत ताप या जल विद्युत परियोजनाओं के समय के समान है। ताप और जलविद्युत संयंत्र स्थापित करने में करीब पांच से छह साल लगते हैं, जिसके अनुरूप भारत में ग्रिड विकास होता है।
हालांकि, सुजलॉन के नेता के मुताबिक ग्रिड विकास के समय को घटाकर 12 से 18 महीने तक करने की जरूरत है ताकि यह देश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि की गति से मेल खा सके। सौर और पवन परियोजनाओं को स्थापित करने में महज दो-तीन साल लगते हैं, जिससे ग्रिड विकास में अंतराल की समस्या सामने आती है।
भारत के महत्वाकांक्षी पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ग्रिड संवर्द्धन को वरीयता देनी होगी और परियोजना नीलामी की गति को बनाए रखना होगा।