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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का स्पष्ट रुख: नए स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार जरूरी
भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार के बाद भी सभी स्थायी सदस्यों को समान वीटो अधिकार दिए जाने चाहिए। भारत के अनुसार वीटो शक्ति के बिना स्थायी सदस्यता द्वितीय श्रेणी की होगी।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार को लेकर भारत ने अपनी स्पष्ट स्थिति रखी है। भारत का मानना है कि परिषद का पुनर्गठन करते समय किसी भी नए स्थायी सदस्य को वीटो अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। भारत के अनुसार यह न्याय और समानता के सिद्धांत के विरुद्ध होगा।
भारत ने जोर देकर कहा है कि जब तक सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति का प्रावधान बना रहेगा, तब तक सभी स्थायी सदस्यों को इस अधिकार से लैस होना चाहिए। भारत के अनुसार वीटो के बिना स्थायी सदस्यता का मतलब है कि कुछ देशों को दूसरों के मुकाबले कम अधिकार दिए जा रहे हैं।
भारत का तर्क है कि सुरक्षा परिषद में समानता और न्याय होना चाहिए। प्रत्येक स्थायी सदस्य को समान दायित्व और समान अधिकार दिए जाने चाहिए। भारत इस बात पर बल दे रहा है कि परिषद के सुधार में किसी भी तरह के भेदभाव को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भारत की यह स्थिति संयुक्त राष्ट्र के सुधार की चल रही बहस में महत्वपूर्ण है। भारत स्वयं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य बनने की अपनी आकांक्षा को लेकर जाना जाता है।