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दुर्लभ रोगों की दवाओं में भारत का अगला बड़ा अवसर

भारत के सस्ती दवाओं के कारोबार की वैश्विक पहचान है, लेकिन अब दुर्लभ रोगों की दवाओं को सुलभ बनाने की चुनौती सामने है। नियामकीय सुधार और सरकारी समर्थन से भारत इस क्षेत्र में वैश्विक प्रतिद्वंद्वी बन सकता है।

LSN India · 29 September 2026

दुर्लभ रोगों की दवाओं में भारत का अगला बड़ा अवसर

भारत की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री ने दशकों से सामान्य बीमारियों की सस्ती दवाएं उपलब्ध कराकर दुनिया को प्रभावित किया है। अब इसी सफलता को दुर्लभ रोगों की दवाओं के क्षेत्र में दोहराने का समय आ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस नए क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है।

दुर्लभ रोग उन बीमारियों को कहा जाता है जो बहुत कम लोगों को प्रभावित करती हैं। इन बीमारियों की दवाओं का विकास महंगा होता है, जिससे उनकी कीमतें आसमान छूती हैं और आम लोगों तक पहुंच नहीं बन पाती। वर्तमान में विश्व बाजार में इन दवाओं की कमी और उच्च मूल्य एक प्रमुख समस्या है।

भारत को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए नियामकीय मार्ग को सरल बनाना होगा। इसके अलावा सरकार को उत्पादकों को उचित वित्तीय प्रोत्साहन देने की जरूरत है। सार्वजनिक खरीद कार्यक्रमों के माध्यम से भी दवाओं की मांग को सुनिश्चित किया जा सकता है।

इन सुधारों के जरिए भारत न केवल घरेलू रोगियों को राहत दे सकता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों के सहयोग से भारत इस क्षेत्र में एक वैश्विक प्रतिस्पर्धी बन सकता है। यह कदम न केवल व्यावसायिक दृष्टि से लाभकारी होगा, बल्कि दुर्लभ रोगों से जूझ रहे लाखों लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है।