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भारत ने हिंद-प्रशांत महासागर डेटा साझेदारी का प्रस्ताव रखा
भारत के रक्षा सचिव ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समुद्री डेटा विनिमय और कृत्रिम बुद्धिमत्ता नेटवर्क के चार प्रस्ताव रखे हैं। ये पहल क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करने का लक्ष्य रखते हैं।
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भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामुद्रिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए एक व्यापक प्रस्ताव रखा है। इसमें महासागरीय डेटा के आदान-प्रदान, समुद्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता नेटवर्क की स्थापना, प्रदूषण निगरानी और अकादमिक अनुसंधान में सहयोग शामिल है।
सिंह के प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय देशों को एक साझा मंच पर लाना है जहां वे महासागरीय संसाधनों और पर्यावरणीय चुनौतियों से संबंधित जानकारी साझा कर सकें। इस ढांचे के माध्यम से, भारत और इसके साझेदार देश समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक साथ आगे बढ़ा सकते हैं।
प्रस्तावित समुद्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता नेटवर्क क्षेत्र में उभरती तकनीकी क्षमताओं को एकीकृत करेगा। यह नेटवर्क जलवायु परिवर्तन, समुद्री प्रदूषण और जैव विविधता के संरक्षण से संबंधित डेटा को संकलित और विश्लेषण करने में सहायता करेगा।
अकादमिक और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग भी इस पहल का एक महत्वपूर्ण अंग है। भारत का मानना है कि ज्ञान साझेदारी और संयुक्त शोध परियोजनाओं के माध्यम से, क्षेत्रीय देश सामुद्रिक विज्ञान में अपनी दक्षता को बढ़ा सकते हैं और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए बेहतर तैयारी कर सकते हैं।