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भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भरता का प्रयास: घरेलू बनाम आयात
भारत स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह अभी भी चिप्स और घटकों के लिए आयात पर निर्भर है। नई इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम घरेलू उत्पादन को बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
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भारत इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों का अधिकांश उत्पादन अभी भी विदेशों से आयात करता है। देश में मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सेमीकंडक्टर चिप्स, पीसीबी और अन्य महत्वपूर्ण घटकों का विशाल हिस्सा बाहर से खरीदा जाता है।
इस स्थिति को बदलने के लिए भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कम्पोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों का उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता को कम करना है। सरकार इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।
वर्तमान में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में असेंबली और सरल विनिर्माण कार्य ही मुख्य रूप से होता है। जटिल चिप्स और उन्नत घटकों के निर्माण के लिए अभी भी तकनीकी कौशल और बुनियादी ढांचे की कमी है। ईसीएमएस के माध्यम से सरकार इन कमियों को दूर करने का प्रयास कर रही है।
इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स घटक निर्माण को बढ़ाने से भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और आयात पर खर्च भी कम होगा। साथ ही, इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और देश का आर्थिक विकास तेजी से आगे बढ़ेगा।