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गहरे समुद्र में गैस की कीमत 9.89 डॉलर तक बढ़ी, एपीएम गैस 7 डॉलर पर स्थिर
सरकार ने अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक की अवधि के लिए कठिन क्षेत्रों से निकाली जाने वाली गैस की कीमत में वृद्धि की है। केजी-डी6 ब्लॉक सहित गहरे समुद्र की गैस के लिए नई सीमा 9.89 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तय की गई है।
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भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस के मूल्य निर्धारण में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। गहरे समुद्र और कठिन क्षेत्रों से निकाली जाने वाली गैस की कीमत की ऊपरी सीमा को 9.89 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट) निर्धारित किया गया है। यह नई कीमत अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 की अवधि के लिए लागू होगी।
इसके अंतर्गत केजी-डी6 ब्लॉक जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्र भी शामिल हैं, जो भारत के आफशोर गैस उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गहरे समुद्र से गैस निकालना तकनीकी रूप से अधिक जटिल और खर्चीला होता है, इसलिए इन क्षेत्रों के लिए अलग मूल्य निर्धारण किया जाता है।
इसके विपरीत, ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड के पारंपरिक और पुराने खेतों से निकाली जाने वाली गैस, जिसे एपीएम (एडमिनिस्ट्रेटेड प्राइस मैकेनिज्म) गैस कहा जाता है, की कीमत 7 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू पर बनी रहेगी। यह मूल्य सरकार के नियंत्रित मूल्य नीति के तहत निर्धारित किया जाता है।
इस कदम का उद्देश्य गहरे समुद्र के खेतों में निवेश को प्रोत्साहित करना और भारत के घरेलू गैस उत्पादन को बढ़ावा देना है। साथ ही, पारंपरिक क्षेत्रों के लिए स्थिर मूल्य सुनिश्चित करके सरकार उपभोक्ताओं के हितों की भी रक्षा कर रही है।