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डीजल और विमानन ईंधन पर निर्यात शुल्क बढ़ा, पेट्रोल शुल्क समाप्त किया
सरकार ने डीजल निर्यात शुल्क को तीन रुपये बढ़ाकर 11.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि विमानन ईंधन पर कर 11 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले 2.50 रुपये के शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
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सरकार ने मंगलवार को निर्यात शुल्क की नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। डीजल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क पहले की तुलना में 3 रुपये अधिक होगा और अब यह 11.50 रुपये प्रति लीटर पर तय किया गया है। यह कदम देश में डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने की रणनीति का हिस्सा है।
विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर भी निर्यात शुल्क बढ़ाया गया है, जिसे 11 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। यह कदम विमानन क्षेत्र के लिए ईंधन लागत को नियंत्रित करने का प्रयास माना जा रहा है। साथ ही, इस नई नीति में पेट्रोल निर्यात पर पहले से लगने वाला 2.50 रुपये प्रति लीटर का शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह नीति परिवर्तन घरेलू ईंधन बाजार को स्थिर करने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के झूलों से भारतीय उपभोक्ताओं को बचाने के उद्देश्य से लिया गया है। पेट्रोल पर शुल्क हटाने से निर्यातकों को अधिक प्रतिस्पर्धी बने रहने का मौका मिल सकेगा।