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भारत ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को किया खारिज, युवाओं के अधिकारों का दावा
भारतीय राजनयिकों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ की रिपोर्ट का कड़ा विरोध किया है, जिसमें देश के युवाओं पर प्रतिशोधी कार्रवाई की आशंका जताई गई थी। भारत ने अपने संविधान में नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए दावा किया है कि इस देश में अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता सुरक्षित है।
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नई दिल्ली - भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञ द्वारा जारी एक रिपोर्ट को दृढ़ता से खारिज कर दिया है। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारतीय युवा सरकार के विरुद्ध सवाल उठाने पर प्रतिशोधी कार्रवाई का सामना करते हैं।
भारतीय राजनयिकों ने अपने जवाब में जोर देकर कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को व्यापक अधिकार प्रदान करता है। इनमें शांतिपूर्ण सभा करने का अधिकार, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा संगठन बनाने और सदस्य बनने की आजादी शामिल है।
भारत ने अपनी ओर से सवाल उठाया कि विश्व के किस देश में युवा सरकार से प्रश्न पूछ सकते हैं और अपनी आवाज उठा सकते हैं। इस बयान में भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिक स्वतंत्रताओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया है।
यह मामला अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार प्रश्नों पर भारत के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। नई दिल्ली लगातार इस बात पर जोर देती रही है कि भारत एक संवैधानिक लोकतंत्र है जहां नागरिकों को उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा मिली हुई है।