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200 टन की मशीन उत्तर प्रदेश पहुंची, गन्ने से बनेगा बायोप्लास्टिक
लखीमपुर खीरी में 308 पहियों वाले विशेष ट्रक से पहुंची एक विशाल मशीन अब बेल्जियम से आयातित तकनीक के जरिए गन्ने को पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक में बदलेगी। 3,080 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस बायोप्लास्टिक प्लांट से भारत के पॉलीलैक्टिक एसिड उत्पादन में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है।
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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक अभूतपूर्व औद्योगिक परियोजना आकार लेने जा रही है। बेल्जियम से आयातित 200 टन की एक विशाल मशीन को 308 पहियों वाले एक अतिविशेष ट्रांसपोर्टर के माध्यम से ओडिशा के पोर्ट से स्थलमार्ग पर लखीमपुर खीरी तक पहुंचाया गया है।
यह मशीन भारत के पहले व्यावसायिक स्तर के बायोप्लास्टिक निर्माण संयंत्र का मुख्य घटक है। कुल 3,080 करोड़ रुपये की निवेश लागत से स्थापित किए जा रहे इस प्लांट में गन्ने को पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) में रूपांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पीएलए एक जैविक-विघटनीय प्लास्टिक है जो पर्यावरण के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।
यह परियोजना भारत के कृषि अवशेषों को उच्च मूल्य वाली रासायनिक वस्तुओं में परिवर्तित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गन्ने से पीएलए बनाने की यह प्रक्रिया न केवल पैकेजिंग उद्योग के लिए टिकाऊ विकल्प प्रदान करेगी, बल्कि स्थानीय किसानों के लिए नए आर्थिक अवसर भी सृजित करेगी।
इस संयंत्र के पूर्ण संचालन होने के बाद यह देश में जैव-आधारित प्लास्टिक उत्पादन में एक नई मिसाल स्थापित करेगा और पारंपरिक पेट्रोल-आधारित प्लास्टिक के विकल्पों को बढ़ावा देगा।