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भारत ने खारिज की वीटो के बिना UNSC स्थायी सदस्यता
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर भारत ने एक बार फिर अपनी दृढ़ स्थिति दोहराई है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने स्पष्ट किया कि वीटो शक्ति के बिना स्थायी सदस्यता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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नई दिल्ली - भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार प्रस्तावों पर अपनी सख्त रुख बनाए रखते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि वीटो शक्ति के बिना स्थायी सदस्यता मात्र 'द्वितीय श्रेणी' का दर्जा है।
भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने इस बात पर जोर दिया कि UNSC में भारत की सदस्यता केवल नाममात्र नहीं हो सकती। उन्होंने इस मुद्दे पर भारत की वास्तविक स्थिति को रेखांकित किया कि किसी भी सुधार योजना में भारत को संपूर्ण और समान अधिकार मिलने चाहिए।
वर्षों से UNSC के पुनर्गठन की चर्चा चल रही है, लेकिन स्थायी सदस्यों के वीटो अधिकार और नई सदस्यता के मुद्दे पर विभिन्न देशों के बीच मतभेद बना हुआ है। भारत का पक्ष है कि यदि उसे स्थायी सदस्य बनाया जाए तो उसे अन्य स्थायी सदस्यों के समान वीटो अधिकार भी मिलने चाहिए।
भारत ने विकासशील देशों के हितों की प्रतिनिधित्व को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि सुरक्षा परिषद की संरचना आधुनिक विश्व व्यवस्था के अनुरूप होनी चाहिए। राजदूत पर्वथनेनी के बयान से यह स्पष्ट है कि भारत किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है जो उसके देश के अधिकारों को कम आंके।