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कश्मीर मुद्दे पर भारत का तुर्की को कड़ा संदेश, बाहरी हस्तक्षेप नहीं सहेगा
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन की कश्मीर संबंधी टिप्पणी को दृढ़ता से खारिज किया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और किसी विदेशी को इस पर टिप्पणी का कोई अधिकार नहीं।
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भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन द्वारा कश्मीर पर की गई टिप्पणियों का कड़ा विरोध किया है। एर्दोगन ने दक्षिण एशिया के विवादों, विशेषकर कश्मीर मसले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार सुलझाने की बात कही थी।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विषय भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से सीधे जुड़ा हुआ है।
जायसवाल ने जोर देते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले पर किसी बाहरी देश या अंतरराष्ट्रीय पक्ष को कोई टिप्पणी या हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। भारत ने अपने रुख को अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्रीय संप्रभुता के सिद्धांतों पर आधारित बताया है।
यह घटना उस समय सामने आई है जब भारत और तुर्की के बीच कूटनीतिक संबंधों में तनाव देखा जा रहा है। भारत का यह दृढ़ रुख यह संकेत देता है कि वह अपने आंतरिक मामलों पर किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।