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भारत ने संयुक्त राष्ट्र पर 'चयनात्मक निशाना साधने' का आरोप लगाया
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक मानवाधिकार विशेषज्ञों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस की 'कठोर कार्रवाई' को लेकर चिंता जताई है। भारत सरकार ने इस आरोप को खारिज करते हुए संयुक्त राष्ट्र पर पक्षपाती रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के विशेषज्ञों ने भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर पुलिस की प्रतिक्रिया को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। जिनेवा में स्थित इन 20 से अधिक विशेषज्ञों ने कहा है कि देश में प्रदर्शनकारियों के साथ बार-बार कठोर व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने नागरिक स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार के संबंध में मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
भारत सरकार ने इन आरोपों का जोरदार विरोध किया है और संयुक्त राष्ट्र पर वैश्विक मंच का दुरुपयोग करके भारत को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। नई दिल्ली का कहना है कि यह 'चयनात्मक' दृष्टिकोण है और अन्य देशों में समान या अधिक गंभीर घटनाओं को नजरअंदाज किया जाता है। भारतीय प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि देश कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपने दायित्वों का पालन करता है।
भारत सरकार का तर्क है कि वह प्रदर्शन के अधिकार में विश्वास करती है लेकिन यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि ऐसे कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहें। सरकार का मानना है कि अगर किसी प्रदर्शन में हिंसा होती है तो पुलिस को वैध कारणों से कार्रवाई करनी पड़ती है। यह विवाद अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि और नागरिक स्वतंत्रता के बीच चल रहे विवाद को उजागर करता है।