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भारत निवेश संधि मॉडल में बड़े बदलाव, नई रणनीति अपना रहा है
संयुक्त अरब अमीरात और इजराइल के साथ हाल की संधियों में भारत ने निवेश संरक्षण को लेकर नया दृष्टिकोण दिखाया है। संवेदनशील क्षेत्रों में नियामकीय सुरक्षा बनाए रखते हुए भारत मध्यस्थता समय को कम और निवेश सुरक्षा को व्यापक बनाने की ओर बढ़ रहा है।
LSN India ·

भारत अपने द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) के ढांचे को नई दिशा दे रहा है। हाल में संपन्न की गई संयुक्त अरब अमीरात और इजराइल के साथ संधियां इसी नई रणनीति का संकेत देती हैं। इन समझौतों में निवेशकों को तेजी से और प्रभावी रूप से विवाद निपटान की सुविधा दी गई है।
नई संधियों की खासियत यह है कि ये अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित करती हैं। साथ ही, विदेशी निवेशकों के लिए सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाया गया है। इससे निवेश आकर्षित करने में भारत की प्रतिबद्धता का संदेश मिलता है।
हालांकि, भारत ने इन संधियों में अपनी नियामकीय स्वायत्तता को भी सुरक्षित रखा है। स्वास्थ्य, पर्यावरण और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भारत अपनी स्वतंत्र नीति बनाने का अधिकार बनाए रखता है। इससे विकास संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियां लागू करने की छूट भारत के पास रहती है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत की यह नई रणनीति एक संतुलित दृष्टिकोण है। यह न केवल विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए आवश्यक विश्वास बनाती है, बल्कि देश की विकासशील अर्थव्यवस्था के हितों की भी रक्षा करती है।