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सरकार नियमित विमान किराए पर नियंत्रण नहीं लगाएगी, आपातकाल में कीमतें सीमित करेगी
भारत सरकार ने आम परिस्थितियों में विमान किराए पर नियमित नियंत्रण लगाने से इनकार किया है। हालांकि, असाधारण परिस्थितियों के दौरान किराए पर कैप लगाने का प्रावधान रखा गया है।
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भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए नई नीति की घोषणा करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह दैनिक आधार पर वायु किराए को नियंत्रित नहीं करेगी। इसके बजाय, सरकार का ध्यान विमान सेवा प्रदाताओं की मूल्य निर्धारण नीतियों पर कड़ी निगरानी रखने पर केंद्रित होगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह दृष्टिकोण बाजार के मुक्त संचालन को बनाए रखता है और विमान कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर सेवा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करता है। नियमित विमान किराए पर सीमा लगाने से रोग-निरोधक क्षमता में बाधा आ सकती है और नई सेवाओं के विस्तार में बाधा बन सकती है।
तथापि, सरकार ने आपातकालीन स्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं या अन्य असाधारण परिस्थितियों में विमान किराए पर अधिकतम मूल्य निर्धारण के प्रावधान को मंजूरी दी है। ये कदम युद्ध, महामारी या अन्य गंभीर संकटों के समय यात्रियों की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।
विमान उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि यह संतुलित दृष्टिकोण भारतीय हवाई परिवहन को प्रतिस्पर्धी रखते हुए जनहित की सुरक्षा करता है। सरकार की निगरानी तंत्र मूल्य निर्धारण में किसी भी दुर्भावनापूर्ण प्रथा को रोकने के लिए पर्याप्त होगा।