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अमेरिकी टैरिफ कानून पर भारत-रूस-चीन का मोर्चा
संयुक्त राज्य अमेरिका के नए टैरिफ कानून को लेकर भारत, रूस और चीन एकजुट हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देने वाले इस कानून के खिलाफ तीनों देशों ने अपनी स्पष्ट रुख अपनाई है।
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भारत और चीन विश्व के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक के रूप में उभरे हैं, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका का हाल ही में अधिनियमित किया गया एक नया कानून राष्ट्रपति को इन दोनों देशों के साथ-साथ रूस के विरुद्ध 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की व्यापक शक्तियां देता है। यह कदम तीनों देशों के बीच आर्थिक असंतुष्टि को लेकर व्यापक चिंता का कारण बना है।
इस मुद्दे पर भारत की स्थिति स्पष्ट है। दिल्ली ने जोर देकर कहा है कि अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना इसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसी परिस्थितियों में, भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सर्वोत्तम आपूर्तिकर्ताओं से संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
चीन ने भी अमेरिकी कदम की आलोचना करते हुए समान विचार व्यक्त किए हैं। बीजिंग ने रेखांकित किया कि अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। चीन के अधिकारियों के अनुसार, किसी भी बाहरी प्रतिबंध या टैरिफ इस महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्रभावित नहीं करेंगे।
त्रिपक्षीय असंतुष्टि इस बात को दर्शाती है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में राष्ट्रों की सार्वभौमिक आवश्यकताओं और संरक्षणवादी व्यापार नीतियों के बीच टकराव कितना तीव्र हो गया है। अगले महीनों में इस विवाद के विकास पर सभी की निगाह रहेगी।