Business · India Bureau
भारत के 'ना' ने खाद्य सुरक्षा को बचाया, किसान हित सुरक्षित रहे
2014 में विश्व व्यापार संगठन के समझौते को मंजूरी न देकर भारत ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया था। यह कदम आज भी देश की खाद्य सुरक्षा और किसान कल्याण कार्यक्रमों की रक्षा करता है।
LSN India ·

विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर भारत के उस साहसिक निर्णय को याद किया जा रहा है जब देश ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के एक प्रस्तावित व्यापार समझौते को मंजूरी देने से इंकार कर दिया था। यह निर्णय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सार्वजनिक खाद्य भंडारण के अधिकारों की रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ।
2014 में जब डब्ल्यूटीओ सदस्य देशों के बीच बाली समझौते पर चर्चा हो रही थी, भारत ने अपने किसानों और खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों की सुरक्षा के लिए इस प्रस्ताव का विरोध किया। भारत की चिंता यह थी कि यह समझौता सार्वजनिक खाद्य भंडारण की नीतियों में बाधा डाल सकता है, जो देश के लाखों गरीब परिवारों के लिए जीवनरेखा के समान हैं।
भारत का यह वैश्विक मंच पर लिया गया कदम आंतरराष्ट्रिक व्यापार के सिद्धांतों को चुनौती देते हुए राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने वाला साबित हुआ। पूरे देश के सार्वजनिक वितरण तंत्र और खाद्य सुरक्षा योजनाएं इसी नीति के तहत संचालित होती हैं, जो लाखों लोगों को सस्ते अनाज की आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं।
वर्तमान समय में भी यह निर्णय भारत की कृषि नीति और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों की नींव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह साहस न केवल देश बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र के विकासशील देशों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है, जहां खाद्य सुरक्षा आज भी एक गंभीर चुनौती है।