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भारत की कृषि-सौर ऊर्जा क्षमता 3-4 वर्षों में 5 गीगावाट तक पहुंचेगी
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव ने बताया कि कृषि और सौर ऊर्जा के समन्वय से भारत में नई संभावनाएं उजागर हो रही हैं। नई दिल्ली में होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से पहले इस महत्वाभिलाषी लक्ष्य की घोषणा की गई है।
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भारत की कृषि-सौर ऊर्जा यानी एग्रीवोल्टेइक्स क्षमता अगले तीन से चार वर्षों में 5 गीगावाट से अधिक हो जाने की उम्मीद है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष सारंगी ने यह जानकारी मीडिया को संबोधित करते हुए दी।
सारंगी की टिप्पणी 21 से 23 अक्टूबर तक नई दिल्ली में आयोजित होने वाले सातवें एग्रीवोल्टेइक्स विश्व सम्मेलन की पूर्वसंध्या पर आई है। यह सम्मेलन कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा के संयोजन पर केंद्रित है और इस क्षेत्र में भारत की प्रगति को प्रदर्शित करेगा।
एग्रीवोल्टेइक्स एक ऐसी तकनीक है जो सौर पैनलों को कृषि भूमि पर लगाकर बिजली उत्पादन के साथ-साथ खेती को जारी रखने की अनुमति देती है। इस पद्धति से किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है और भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मदद मिलती है।
भारत ने अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए सौर और अन्य पुनर्नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में काफी निवेश किया है। एग्रीवोल्टेइक्स इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा दोनों को बढ़ावा देता है।