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भारत की तैरती सौर ऊर्जा योजना: महत्वाकांक्षी या जोखिमभरी?
भारत की प्रधानमंत्री-संचालित योजना पांच गीगावाट तैरती सौर क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखती है, लेकिन अधिक लागत और तकनीकी चुनौतियां इसके विस्तार में बाधा बन सकती हैं।
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भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जलाशयों और कृत्रिम झीलों पर तैरती सौर ऊर्जा प्रणालियां स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री-संचालित योजना (पीएम-एसएसवाई) के तहत 5 गीगावाट की तैरती सौर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें दो घंटे की ऊर्जा भंडारण सुविधा भी शामिल होगी। इस परियोजना के लिए 28,500 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी।
तैरती सौर प्रणाली जमीन के उपयोग को बचाने का एक महत्वपूर्ण तरीका है और जल वाष्पीकरण को कम करने में सहायक हो सकती है। हालांकि, यह योजना कई तकनीकी और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च पूंजीगत लागत, रखरखाव की जटिलताएं और लवणीय जल क्षेत्रों में संक्षारण संबंधी समस्याएं इस तकनीक को व्यावहारिक स्तर पर लागू करना कठिन बना सकती हैं।
यह योजना भारत की नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ाने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है, लेकिन बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए तकनीकी सुधार और लागत में कमी आवश्यक है। ऊर्जा विश्लेषकों का सुझाव है कि परियोजना के सफल होने के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार डिजाइन और संचालन को अनुकूलित करना होगा।