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भारतीय बैंकों का रिकॉर्ड नकद अधिशेष तेजी से घट रहा है
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति के कारण बैंकों के पास जमा अतिरिक्त धन सितंबर की शुरुआत में 11 ट्रिलियन रुपये से घटकर 462 अरब रुपये रह गया है। यह गिरावट रुपये के मूल्य को नियंत्रित करने की आरबीआई की रणनीति का परिणाम है।
LSN India ·

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में नकद सरप्लस की स्थिति में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर की शुरुआत में जब बैंकों के पास नकद अधिशेष 11 ट्रिलियन रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, तो 26 अक्टूबर तक यह घटकर महज 462 अरब रुपये रह गया।
इस तेजी से घटते अधिशेष का प्रमुख कारण भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा रुपये के मूल्य पर नियंत्रण के लिए की गई नीतिगत कार्रवाई है। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय करेंसी के अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए कई उपाय लागू किए हैं।
नकद अधिशेष में यह गिरावट मौद्रिक प्रणाली में तरलता को कम करने के संकेत देती है। जब बैंकों के पास अतिरिक्त नकद कम होता है, तो उधार देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और ब्याज दरों में परिवर्तन हो सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई की यह कार्रवाई न केवल रुपये को स्थिर रखने के लिए बल्कि समग्र आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। आने वाले सप्ताहों में बैंकिंग क्षेत्र की तरलता स्थिति पर ध्यान केंद्रित रहेगा।