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नई दिल्ली में BRICS: भारत के लिए रणनीतिक स्वायत्तता की परीक्षा

भारत के होस्ट राष्ट्र के रूप में BRICS शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत की आधुनिक विदेश नीति के मूल सिद्धांत - रणनीतिक स्वायत्तता - को परीक्षा में डालती है। इस महत्वपूर्ण भूमिका में भारत को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपने संतुलन को बनाए रखना होगा।

LSN India · 12 September 2026

भारत द्वारा BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी एक महत्वपूर्ण राजनयिक घटना है जो देश की विदेश नीति के दर्शन को प्रतिबिंबित करती है। पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का यह समूह - ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका - वैश्विक राजनीति और अर्थतंत्र में अपनी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

भारत की अध्यक्षता के तहत, BRICS को विविध सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। यह जिम्मेदारी भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति को परीक्षा में डालती है - एक ऐसी नीति जो किसी भी शक्ति समूह के प्रति अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है।

इस मंच पर भारत को विकासशील देशों की आवाज उठानी होगी, साथ ही वैश्विक मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र स्थिति बनाए रखनी होगी। सदस्य देशों के बीच अलग-अलग हित और विचारधाराएं मौजूद हैं, जिन्हें नेविगेट करना भारत के विदेश नीति कौशल की परीक्षा लेगा।

भारत का BRICS अध्यक्षतत्व देश की बहुपक्षीय कूटनीति और वैश्विक मंच पर अपनी बढ़ती भूमिका का प्रमाण है। इस दायित्व को संभालने का तरीका भारत की रणनीतिक दूरदर्शिता और राजनयिक परिपक्वता का संकेतक होगा।