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BS-VII मानदंड से वाहनों का उत्सर्जन नियंत्रण और बैटरी की गुणवत्ता में सुधार
भारत के प्रस्तावित BS-VII नियम ब्रेक और टायर उत्सर्जन को विनियमित करेंगे तथा इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी की स्थायित्व संबंधी मानदंड स्थापित करेंगे। वास्तविक परिस्थितियों में उत्सर्जन परीक्षण को भी 2029 से और कड़ा किया जाएगा।
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भारत के वाहन उत्सर्जन नियंत्रण में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सरकार ने BS-VII मानदंड तैयार किए हैं जो पर्यावरणीय प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अधिक व्यापक दृष्टिकोण अपनाएंगे। ये नए मानदंड केवल निकास गैसों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ब्रेक और टायर जनित प्रदूषण को भी नियंत्रित करने का प्रावधान करेंगे।
इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए, BS-VII नियमों में बैटरी की गुणवत्ता और स्थायित्व संबंधी मानदंड भी शामिल किए गए हैं। ये मानदंड निर्माताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करेंगे कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियां दीर्घकालीन प्रदर्शन प्रदान करें और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हों।
2029 से लागू होने वाले इन नियमों का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू वास्तविक परिस्थितियों में उत्सर्जन परीक्षण को और अधिक कठोर बनाना है। यह कदम प्रयोगशाला परीक्षण और वास्तविक दुनिया के उपयोग में अंतर को कम करने का लक्ष्य रखता है, जिससे वाहन निर्माताओं को अपने प्रदूषण नियंत्रण प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
भारत की ये पहल वैश्विक स्तर पर सबसे सख्त उत्सर्जन मानदंडों में से एक बनने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल वायु प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि आने वाले दशकों में भारत की जनता के स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।