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भारत में बढ़ रही सिजेरियन डिलीवरी, चिकित्सकों की चिंता बरकरार
भारत में पिछले पांच वर्षों में सिजेरियन डिलीवरी की दर में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस प्रवृत्ति को लेकर चिंतित हैं क्योंकि सर्जरी की सुविधा को अक्सर चिकित्सीय आवश्यकता से अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
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भारत में सिजेरियन डिलीवरी की दर में तेजी से वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 से 2021 के बीच यह दर 17.2 प्रतिशत से बढ़कर 21.5 प्रतिशत हो गई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव की विधि का निर्णय केवल सुविधा या व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं, बल्कि चिकित्सकीय कारणों के आधार पर लिया जाना चाहिए।
हालांकि, वर्तमान में कई महिलाएं स्वयं ही सिजेरियन प्रक्रिया कराने के लिए इच्छुक देखी जा रही हैं। इसके पीछे विभिन्न कारण हो सकते हैं, जिनमें व्यक्तिगत सुविधा, समय की बाध्यता और योनि प्रसव से संभावित जटिलताओं का डर शामिल हैं।
स्वास्थ्य पेशेवरों का कहना है कि बिना चिकित्सकीय कारण के सिजेरियन कराना मां और बच्चे दोनों के लिए अनावश्यक जोखिम बढ़ा सकता है। शल्य चिकित्सा से जुड़ी जटिलताएं, संक्रमण और भविष्य की गर्भावस्था में समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए प्रसव का तरीका तय करने से पहले महिलाओं को अपने चिकित्सक से विस्तार से परामर्श लेना चाहिए।
विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि यदि कोई चिकित्सकीय कारण न हो तो प्राकृतिक प्रसव को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। महिलाओं को सही जानकारी प्रदान करना और उन्हें सूचित निर्णय लेने में सहायता करना स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की जिम्मेदारी है।