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चार महीने में पूंजीगत व्यय लक्ष्य का 37 प्रतिशत पूरा, खर्च में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी
अप्रैल से जुलाई के बीच सरकार की पूंजीगत व्यय 30 प्रतिशत बढ़कर 4.51 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गई है। इसी अवधि में राजकोषीय घाटा लगभग 3 प्रतिशत घटकर 4.55 ट्रिलियन रुपये रह गया है।
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वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत में सरकार की निवेश गतिविधियां तेजी पकड़ रही हैं। अप्रैल से जुलाई की चार महीने की अवधि में पूंजीगत व्यय में साल दर साल आधार पर 30 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह व्यय 4.51 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया है, जो पूरे वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्य का 37 प्रतिशत है।
इस अवधि में सरकार की कुल राजकोषीय घाटा 4.55 ट्रिलियन रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 3 प्रतिशत कम है। पूंजीगत व्यय में तेजी आर्थिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
व्यय के इस रुझान से संकेत मिलता है कि सरकार चालू वित्तीय वर्ष में अपने निवेश लक्ष्यों को पूरा करने की गति से अग्रसर है। पूंजीगत व्यय में की गई यह निरंतर प्रगति अर्थव्यवस्था के विकास और रोजगार सृजन के लिए जरूरी है।
आने वाले महीनों में सरकार की व्यय गति और राजकोषीय प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित रहेगा, क्योंकि वर्ष की बाकी अवधि में और भी अधिक परियोजनाएं क्रियान्वित होंगी।