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बिजली की मांग बढ़ने से कोयला संकट गहराया, संकटग्रस्त संयंत्रों की संख्या बढ़ी
देश भर में बिजली उत्पादन संयंत्रों में कोयले का संकट गहरा गया है। अक्टूबर के मध्य में 96 विद्युत केंद्रों के पास तीन दिन से भी कम अवधि के लिए कोयले का भंडार रह गया है।
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बिजली की मांग में तेजी से वृद्धि के कारण देश के कोयला संचालित विद्युत संयंत्र गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। अक्टूबर के उत्तरार्ध तक ऐसे संयंत्रों की संख्या 96 तक पहुंच गई है जहां कोयले का भंडार मात्र तीन दिन की बिजली उत्पादन क्षमता के बराबर रह गया है।
सितंबर के मध्य में यह स्थिति बेहतर थी जब केवल 60 विद्युत केंद्रों के पास ही कोयले का भंडार इतना कम था। गत डेढ़ महीने में संकटग्रस्त संयंत्रों की संख्या में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मौसमी मांग और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी के कारण राष्ट्रीय विद्युत नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है। यह स्थिति कोयले की आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और परिवहन संबंधी चुनौतियों को प्रतिबिंबित करती है।
ऊर्जा नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कमी बिजली की आपूर्ति में रुकावट का संकेत है। सरकार और बिजली कंपनियों को आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने और भंडार बढ़ाने पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।