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2030 तक भारतीय टिकाऊ वस्तु बाजार 3-3.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा
भारत के उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र में घरेलू मूल्य संवर्धन को वर्तमान 50-55 प्रतिशत से बढ़ाकर 2030 तक 65-70 प्रतिशत तक ले जाने की संभावना है। स्थानीय घटक निर्माण में विस्तार से यह लक्ष्य प्राप्त होगा।
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भारतीय उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु बाजार आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि की ओर अग्रसर है। वर्तमान अनुमानों के अनुसार, यह बाजार 2030 तक 3 लाख करोड़ से 3.25 लाख करोड़ रुपये के बीच पहुंच सकता है। यह वृद्धि देश में उपभोक्ता खर्च में निरंतर वृद्धि और मध्यम वर्ग के विस्तार को दर्शाती है।
इस बाजार विस्तार के साथ-साथ, भारत अपनी स्थानीय विनिर्माण क्षमता को भी मजबूत कर रहा है। वर्तमान में उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में घरेलू मूल्य संवर्धन लगभग 50-55 प्रतिशत है। उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दशक में स्थानीय घटक निर्माण में निवेश के माध्यम से यह हिस्सेदारी 65-70 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है।
स्थानीय घटकों के उत्पादन में वृद्धि से भारतीय अर्थव्यवस्था को कई लाभ मिल सकते हैं। इससे देश में विनिर्माण रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आयात पर निर्भरता में कमी आएगी। साथ ही, यह निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को भी बेहतर बना सकता है।
सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना जैसी नीतियां इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ये उपाय देशीय निर्माताओं को विश्व स्तरीय उत्पाद बनाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और प्रोत्साहन प्रदान कर रहे हैं।