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सभी अदालतों में महिला वकीलों के लिए अलग सुविधाएं बनानी होंगी: सुप्रीम कोर्ट
भारत की सभी अदालतों में महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सभी राज्यों और हाई कोर्ट्स को अदालतों में महिलाओं के लिए अलग बार रूम और वॉशरूम बनाने के निर्देश दिए हैं।
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भारतीय न्याय प्रणाली में महिलाओं की बेहतरी के लिए सुप्रीम कोर्ट सख्त कदम उठा रहा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और उच्च न्यायालयों को निर्देशित किया है कि जिला, सब-डिविजनल और तालुका अदालतों में महिला वकीलों के लिए अलग बार रूम और वॉशरूम का निर्माण तुरंत प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
यह कदम देश भर की अदालतों में महिला कानून पेशेवरों के साथ होने वाले भेदभाव को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय है। वर्तमान समय में अधिकांश अदालतों में महिला वकीलों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उन्हें कई असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न्यायिक व्यवस्था में महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। इन सुविधाओं का प्रावधान न केवल महिला वकीलों की कार्य स्थिति को बेहतर बनाएगा, बल्कि न्यायिक प्रणाली में लैंगिक समानता को भी बढ़ावा देगा।