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अप्रैल-अगस्त में कच्चे तेल के आयात बिल में 48% की बढ़ोतरी, 74.8 अरब डॉलर खर्च
भारत ने अप्रैल से अगस्त के बीच कच्चे तेल पर 24.4 अरब डॉलर अधिक खर्च किए, जबकि आयात मात्रा में 0.4% की गिरावट आई। पश्चिम एशिया संघर्ष से उपजी आपूर्ति चिंताओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ीं।
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भारत के कच्चे तेल के आयात बिल में भारी वृद्धि हुई है। अप्रैल से अगस्त 2024 की अवधि में देश ने इस पर कुल 74.8 अरब डॉलर खर्च किए, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 48 प्रतिशत अधिक है।
भारत के आयात की मात्रा में केवल 0.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई, लेकिन बिल में नाटकीय वृद्धि मुख्य रूप से कीमतों में तेज उछाल के कारण हुई। यह अतिरिक्त 24.4 अरब डॉलर खर्च तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह मूल्य वृद्धि मध्य पूर्व में चलाई जा रहे संघर्ष और इससे उपजी आपूर्ति संबंधी चिंताओं से प्रेरित थी।
पश्चिम एशिया में राजनीतिक तनाव से तेल की आपूर्ति पर अनिश्चितता बनी हुई है। यह स्थिति वैश्विक तेल बाजार पर दबाव डाल रही है और एशिया के बड़े तेल आयातकों के लिए आर्थिक चुनौती बन गई है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए तेल पर भारी निर्भरता रखता है। आयात बिल में इस तरह की वृद्धि देश के विदेशी मुद्रा भंडार और समग्र आर्थिक स्थिति पर असर डालती है। आने वाले महीनों में तेल की कीमतों की प्रवृत्ति भारत के आर्थिक संकेतकों को प्रभावित करती रहेगी।