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रूसी और पश्चिम एशियाई तेल आपूर्ति घटने से भारत को संकट
भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी जून-जुलाई में रिकॉर्ड 55 प्रतिशत तक पहुंची थी, लेकिन अब दोनों प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं से आपूर्ति में कमी का खतरा बढ़ गया है।
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भारतीय तेल शोधन उद्योग को आने वाले महीनों में गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। जून और जुलाई के महीनों में रूस भारत के कुल तेल आयात का लगभग 55 प्रतिशत तक की आपूर्ति कर रहा था, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को बड़ी राहत मिली थी। यह रिकॉर्ड आयात भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था।
हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति पर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके अलावा, पश्चिम एशियाई देशों से भी भारत की तेल आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। ये दोनों क्षेत्र भारत के कच्चे तेल आयात के प्रमुख स्रोत हैं।
ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि आपूर्ति में आने वाली कमी से भारतीय रिफाइनरियों के लिए अन्य वैकल्पिक स्रोतों की खोज करनी पड़ सकती है। इससे तेल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं और भारत की ऊर्जा नीति पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार और उद्योग जगत इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं।