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जुलाई में भारत का कच्चा तेल आयात बिल 41 प्रतिशत बढ़कर 13.7 अरब डॉलर हुआ
पश्चिम एशिया में आपूर्ति व्यवधान के बीच कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत का आयात बिल में उल्लेखनीय इजाफा हुआ। जुलाई में भारतीय टोकरी की औसत कीमत 82.04 डॉलर प्रति बैरल रही।
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भारत का कच्चे तेल आयात बिल जुलाई में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 41 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। आयात मात्रा में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो 13 प्रतिशत बढ़कर 21.4 मिलियन टन हो गई।
वैश्विक तेल बाजार में मूल्य वृद्धि का प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान रहा। इसी अवधि में भारतीय टोकरी की औसत कीमत 82.04 डॉलर प्रति बैरल पर रही, जो पूर्ववर्ती महीनों की तुलना में अधिक थी।
भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी तेल खपत करने वाली अर्थव्यवस्था है और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की आपूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर देश के आयात बिल और समग्र आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है।
वर्तमान में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता महत्वपूर्ण बनी हुई है। आने वाले महीनों में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की गतिविधियां देश के कच्चा तेल आयात बिल को प्रभावित करती रहेंगी।