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व्यापार घाटे से चालू खाता घाटा गहरा हुआ, सेवा क्षेत्र की मदद सीमित
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत का चालू खाता घाटे में चला गया, जो पिछली तिमाही के अधिशेष से एक बदलाव है। माल के व्यापार घाटे में वृद्धि से यह नकारात्मक स्थिति बनी है।
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भारत के बाह्य खाते में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश का चालू खाता घाटे की स्थिति में आ गया। यह पिछली तिमाही यानी वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही में दर्ज अधिशेष से एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाता है।
घाटे का मुख्य कारण माल के आयात-निर्यात में बढ़ता असंतुलन है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बने रहने से आयात बिल में वृद्धि हुई है, जबकि निर्यात में पर्याप्त तेजी नहीं आ पाई है।
सेवा क्षेत्र, जो पारंपरिक रूप से चालू खाते में सकारात्मक योगदान देता रहा है, इस बार घाटे को पूरी तरह कवर करने में असमर्थ रहा है। आईटी सेवाएं, व्यावसायिक सेवाएं और पर्यटन जैसे प्रमुख सेवा क्षेत्रों में भी उम्मीद के अनुसार वृद्धि नहीं देखी गई।
बाह्य खाते के इस प्रदर्शन से आर्थिक नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। निर्यात बढ़ाने और आयात को नियंत्रित करने की दिशा में नीतिगत ध्यान दिए जाने की अपेक्षा की जा रही है। साथ ही, विदेशी निवेश को आकर्षित करना भी इस स्थिति को संभालने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।