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BRICS 2026 के बाद भारत का असली चुनौती: पश्चिम से संतुलन बनाना
नई दिल्ली ने BRICS के आंतरिक विवादों को हल नहीं किया, बल्कि शिखर सम्मेलन को डूबने से बचाया। यह कौशल - असहमति के बीच एकता बनाए रखना - भारत की पहचान बन गई है।
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भारत की BRICS 2026 की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण सीख सामने आई है: नई दिल्ली ने इस बहु-राष्ट्रीय गुट के आंतरिक मतभेदों को सुलझाने की बजाय उन्हें प्रबंधित करने में सफलता पाई है। सदस्य देशों के बीच विभिन्न हित और दृष्टिकोण होने के बावजूद, भारत ने शिखर सम्मेलन को एकजुट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह रणनीतिक कौशल - विरोधाभासी विचारों वाले समूह को एक साथ रखना - भारत की वैश्विक राजनीति में एक विशिष्ट पहचान बन रही है। एक ओर जहां BRICS सदस्यों के बीच गहरे मतभेद हैं, वहीं भारत ने इन्हें सर्वसम्मति के लिए व्यावहारिक समाधान तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
विশेषज्ञों का मानना है कि यह संतुलन कार्य भारत के लिए भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती साबित होगा। एक ओर पश्चिमी शक्तियों के साथ सम्बंध बनाए रखना और दूसरी ओर BRICS जैसे गुटों में अपनी प्रभावशाली भूमिका निभाना - यह द्वैध दायरा भारत की विदेश नीति की जटिलता को दर्शाता है। आने वाले समय में यह कौशल भारत की सफलता का मापदंड बन सकता है।