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2047 तक इस्पात उत्पादन क्षमता 604 मिलियन टन तक पहुंचाने का लक्ष्य
सरकार के नए ड्राफ्ट इस्पात नीति में अगले दो दशकों में विशाल विस्तार की योजना है। इस रोडमैप में स्लरी पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार, उत्सर्जन में 39 प्रतिशत की कटौती और 45 मिलियन टन निर्यात को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है।
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भारत के इस्पात क्षेत्र के विकास के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट नीति दस्तावेज़ में वर्ष 2047 तक उत्पादन क्षमता को 604 मिलियन टन तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस विस्तार के लिए कच्चे माल, विशेषकर लौह अयस्क की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है।
नीति के प्रस्तावों में स्लरी पाइपलाइन बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विस्तार शामिल है, जिसके लिए सरकार व्यवहार्यता अंतराल निधि के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। यह कदम परिवहन लागत को कम करते हुए दक्षता बढ़ाने का उद्देश्य रखता है।
पर्यावरणीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए, नीति में उत्सर्जन तीव्रता में 39 प्रतिशत की कटौती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही, स्क्रैप स्टील के उपयोग को विस्तारित करने के उपाय भी सुझाए गए हैं, जो पुनर्चक्रण को बढ़ावा देगा।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूत करने के लिए नीति में वर्ष 2047 तक 45 मिलियन टन इस्पात निर्यात के लक्ष्य को रेखांकित किया गया है। यह भारतीय इस्पात उद्योग को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।