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उच्च जोखिम वाले फार्मा सॉल्वेंट्स के लिए सीडीएससीओ ने अनिवार्य डिजिटल मंजूरी लागू की
केंद्रीय औषधि नियामक सीडीएससीओ ने उच्च जोखिम वाले फार्मास्यूटिकल सॉल्वेंट्स के प्रत्येक बैच के लिए डिजिटल मंजूरी अनिवार्य कर दी है। इस कदम से उद्योग को प्रक्रियाओं में देरी और आपूर्ति में व्यवधान की आशंका है।
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भारतीय ड्रग रेगुलेटर सीडीएससीओ ने उच्च जोखिम वाले औषधि सॉल्वेंट्स के डिजिटल बैच-वार स्वीकृति को अनिवार्य बना दिया है। यह निर्देश औषधि उत्पादन में महत्वपूर्ण रासायनिक घटकों के आयात और उपयोग को नियंत्रित करने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
इस डिजिटल क्लीयरेंस प्रणाली के तहत प्रत्येक बैच को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन से अलग से अनुमोदन प्राप्त करना होगा। नियामक का लक्ष्य औषधि सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करना है, विशेषकर उन सॉल्वेंट्स के मामले में जो स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।
हालांकि, भारतीय फार्मास्यूटिकल उद्योग को इस निर्देश से उत्पादन प्रक्रियाओं में विलंब और आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधान की चिंता है। उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल अनुमोदन प्रक्रिया को अधिक कुशल और समय-सीमित बनाने की आवश्यकता हो सकती है।
सीडीएससीओ का यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और भारत की औषधि सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने का प्रयास है। नियामक ने आशा जताई है कि औषधि निर्माता इस नई प्रणाली के साथ तेजी से अनुकूल हो जाएंगे।