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भारत का ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग बाजार 2034 तक 3 अरब डॉलर होगा
भारत का ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग बाजार 2025 में 1.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2034 तक 3 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। उपकरणों के कम जीवनकाल और सख्त रीसाइक्लिंग नियम इस विकास को चालित कर रहे हैं।
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भारत का इलेक्ट्रॉनिक कचरा रीसाइक्लिंग क्षेत्र आने वाले दशक में उल्लेखनीय वृद्धि की ओर बढ़ रहा है। वर्तमान बाजार मूल्य 1.7 अरब डॉलर से यह अगले नौ वर्षों में लगभग दोगुना होकर 3 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
इस तेजी से विस्तार के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जीवनकाल में कमी आई है, जिससे अधिक संख्या में डिवाइस कचरे में परिणत हो रहे हैं। साथ ही, भारत सरकार द्वारा ई-वेस्ट प्रबंधन के मामले में नियमों को कड़ा किया जा रहा है, जो बाजार में रीसाइक्लिंग गतिविधियों को बढ़ा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक कचरे में कीमती धातुएं और दुर्लभ सामग्रियां होती हैं, जिन्हें निकालना और पुनः उपयोग करना आर्थिक रूप से व्यवहार्य है। यह पुनर्चक्रण प्रक्रिया न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में मदद करती है बल्कि नई रोजगार के अवसर भी सृजित करती है।
विनिर्माण क्षेत्र में डिजिटल रूपांतरण और शहरीकरण के साथ, भारत में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खपत तेजी से बढ़ रही है। यह प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग के बाजार को और अधिक आकर्षक बनाएगी।