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ई20 पेट्रोल जितना महंगा, खाद्य अर्थव्यवस्था पर संकट
भारत की गन्ने से मक्का आधारित इथेनॉल की ओर बढ़त तेल कंपनियों की लागत बढ़ा रही है और सूखे से जूझते कृषि क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ा रही है।
LSN India ·
भारत के ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जैव ईंधन का विस्तार खाद्य अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। सरकार की गन्ने से मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादन की ओर बदलाव की योजना से तेल कंपनियों की लागत में भारी इजाफा होने की आशंका है।
ई20 ईंधन के विस्तार से पैदा होने वाली आर्थिक जटिलताओं का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाला है। मक्का उत्पादन में बढ़ती मांग से पोल्ट्री उद्योग के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, क्योंकि चारे के रूप में मक्का पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण है। देश के विभिन्न हिस्सों में सूखे की स्थिति में यह प्रतिस्पर्धा और भी गंभीर हो सकती है।
अनुमानों के अनुसार, 100 करोड़ लीटर ईंधन उत्पादन के लिए तेल कंपनियों को 813 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ सकता है। यह खर्च आगे चलकर उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।
इथेनॉल ईंधन का विस्तार भले ही पर्यावरणीय और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके आर्थिक और कृषि संबंधी निहितार्थों पर गहन विचार की जरूरत है। सरकार को तेल उद्योग, कृषि क्षेत्र और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की नीति तैयार करनी होगी।