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भारत की अर्थव्यवस्था पश्चिम एशिया संकट के बावजूद 7.8% की दर से बढ़ी
जून त्रैमासिक में सकल मूल्य वर्धन 8.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। निवेश मांग में भी 11.9 प्रतिशत का तेजी देखी गई।
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भारतीय अर्थव्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वृद्धि दर्शाई है। सकल घरेलू उत्पाद में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वैश्विक व्यापार व्यवधान के दौरान भारत की लचीली आर्थिक नीति को प्रदर्शित करती है।
जून की तिमाही में सकल मूल्य वर्धन 8.2 प्रतिशत बढ़ा, जो समग्र आर्थिक गतिविधि में सुदृढ़ता का संकेत है। विनिर्माण क्षेत्र विशेष रूप से मजबूत प्रदर्शन किया, जहां 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। यह संकेत देता है कि औद्योगिक उत्पादन अपेक्षाओं को पार कर रहा है।
पूंजी निवेश में तेजी आर्थिक विस्तार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। निवेश मांग 11.9 प्रतिशत तक पहुंची, जो दीर्घकालीन आर्थिक वृद्धि की नींव तैयार करती है। यह उच्च वृद्धि दर पश्चिम एशिया क्षेत्र में चल रहे अनिश्चितता के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिरता को प्रदर्शित करती है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि विनिर्माण और निवेश में यह मजबूती भारत को प्रतिकूल वैश्विक परिस्थितियों में भी विकास पथ पर रखने में सहायक साबित हो रही है।