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भारत में महिला कार्यबल दोगुना, लेकिन असुरक्षित नौकरियों में वृद्धि
भारत में महिलाओं की कार्यबल भागीदारी 2017-18 से 2025 तक लगभग दोगुनी हुई है, लेकिन यह वृद्धि मुख्य रूप से असुरक्षित रोजगार में केंद्रित है। अधिकांश महिलाओं को कम घंटों में काम करना पड़ रहा है और वेतन में भी बड़ा अंतर बना हुआ है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के बावजूद उन्हें काम की बेहतर शर्तें नहीं मिल रही हैं। हाल के अध्ययन से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में महिला कार्यबल में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, लेकिन ये नई नौकरियां अधिकांशतः अनिश्चित और कम आय वाली हैं।
2017-18 से 2025 के दौरान महिलाओं की कार्यबल संख्या में जो विस्तार हुआ है, वह मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र और अस्थायी रोजगार में केंद्रित है। इन पदों पर काम करने वाली अधिकांश महिलाओं को निर्धारित कार्य घंटों से कम समय के लिए काम करना पड़ता है, जिससे उनकी आय प्रभावित होती है।
वेतन के मामले में भी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम भुगतान किया जाता है। यह वेतन अंतर विभिन्न क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है, जहां समान कार्य के लिए भी महिलाओं को कम मजदूरी मिलती है। अध्ययन से संकेत मिलता है कि आर्थिक विकास के अनुपात में महिलाओं की कार्य सुरक्षा में सुधार नहीं हुआ है।
भारतीय श्रम बाजार में महिलाओं की स्थिति में मजबूती लाने के लिए नीतिगत हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि महिलाओं को उचित वेतन, स्थायी रोजगार और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।