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भारत का पटाखा उद्योग 7000 करोड़ का है, फिर निर्यात क्यों न के बराबर

भारत का पटाखा उद्योग देश में 7,000 करोड़ रुपये का बाजार रखता है, लेकिन वैश्विक निर्यात बाजार में इसकी हिस्सेदारी मात्र 0.042 प्रतिशत है। विशेषज्ञ इस विसंगति के पीछे संरचनात्मक और नीतिगत कारणों की ओर इशारा करते हैं।

LSN India · 5 November 2026

भारत का पटाखा उद्योग 7000 करोड़ का है, फिर निर्यात क्यों न के बराबर

भारत के पटाखा उद्योग के साथ एक विरोधाभास है। देश में यह उद्योग 7,000 करोड़ रुपये का विशाल बाजार तैयार करता है, जो दिवाली और अन्य त्योहारों पर खासतौर से सक्रिय रहता है। इसके बावजूद, भारत का वैश्विक पटाखा निर्यात 1 मिलियन डॉलर से भी कम रहता है, जो कुल विश्व निर्यात का महज 0.042 प्रतिशत है।

यह स्थिति भारतीय निर्माताओं और व्यापारियों के लिए एक बड़ी खामी को उजागर करती है। घरेलू बाजार में मजबूत मांग के बावजूद भारतीय पटाखा निर्माता अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पकड़ नहीं बना सके हैं। चीन और अन्य देश पटाखा निर्यात में भारत से कहीं आगे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पिछड़ेपन के पीछे गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादन प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण न होना, और निर्यात के लिए आवश्यक प्रमाणन प्राप्त न करना जैसे कारण जिम्मेदार हैं। पर्यावरणीय मानदंडों का पालन भी भारतीय निर्माताओं के लिए एक बाधा साबित हुआ है।

भारतीय पटाखा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी में निवेश, उत्पादन क्षमता में सुधार, और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढलने की आवश्यकता है। सरकारी नीतियों में सुधार और निर्यातकों को प्रोत्साहन देने से इस क्षेत्र में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।