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पूंजीगत खर्च और सब्सिडी से अप्रैल-अगस्त में राजकोषीय घाटा बढ़ा
केंद्रीय बजट के 42 प्रतिशत तक पहुंचने वाला राजकोषीय घाटा 7.10 ट्रिलियन रुपये तक विस्तृत हुआ। पूंजीगत व्यय में 18 प्रतिशत और प्रमुख सब्सिडी खर्च में 25 प्रतिशत की वृद्धि इसका प्रमुख कारण है।
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वर्तमान वित्त वर्ष की शुरुआती पाँच महीनों में भारत का राजकोषीय घाटा काफी बढ़ गया है। अप्रैल से अगस्त के दौरान केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 7.10 ट्रिलियन रुपये पर पहुंच गया, जो संपूर्ण बजट अनुमान का 42 प्रतिशत है।
यह विस्तार मुख्य रूप से सरकार की बढ़ी हुई पूंजीगत व्यय नीति और सब्सिडी खर्च में वृद्धि के कारण हुआ है। इसी अवधि में पूंजीगत व्यय 18 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि खाद्य, ईंधन और उर्वरक जैसी प्रमुख वस्तुओं पर सब्सिडी खर्च में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि बजट के पहले भाग में ही इतना अधिक राजकोषीय घाटा वर्ष के शेष समय के लिए सरकार की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव डाल सकता है। बुनियादी ढांचा विकास पर निवेश को आगे बढ़ाने की सरकार की प्रतিबद्धता इस उच्च पूंजीगत व्यय में स्पष्ट दिख रही है।
सरकार को वर्ष के शेष महीनों में राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और राजस्व संग्रहण को बेहतर बनाने की आवश्यकता है ताकि वर्षांत तक घाटे को नियंत्रण में रखा जा सके।