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वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा 7.15 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचा
केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा अप्रैल से सितंबर की अवधि में 7.15 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया है, जो वित्त वर्ष 2026-27 के कुल लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि में 5.7 लाख करोड़ रुपये के घाटे से अधिक है।
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केंद्र सरकार के आर्थिक आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में राजकोषीय घाटे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि में यह घाटा 7.15 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
एक साल पहले की तुलना में, वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में राजकोषीय घाटा 5.7 लाख करोड़ रुपये था। इस प्रकार, छह महीने की अवधि में घाटे में लगभग 1.45 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, यह घाटा वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित कुल लक्ष्य का 42.1 प्रतिशत है। यह संकेत देता है कि यदि यही रफ्तार बनी रहे तो साल के शेष हिस्से में घाटा और भी बढ़ सकता है।
राजकोषीय घाटे में यह वृद्धि सरकार के व्यय और राजस्व संग्रह के बीच के अंतर को प्रतिबिंबित करती है। आने वाले महीनों में सरकार के व्यय प्रबंधन और राजस्व संग्रह के तरीकों पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।