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खाद्य महंगाई 7.74% पर पहुंची, कमजोर मानसून से कीमतें बढ़ीं
सितंबर में प्याज की कीमतें साल दर साल 108 प्रतिशत बढ़ी हैं, जबकि समग्र खाद्य मुद्रास्फीति अगस्त के 48.78 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई है। कमजोर मानसून और एल नीनो के खतरे खाद्य कीमतों में तेजी से उछाल ला रहे हैं।
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भारत में खाद्य मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ रही है। सितंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतें 7.74 प्रतिशत तक पहुंच गईं, जो आने वाले महीनों में आम नागरिकों के बजट पर दबाव डाल सकता है। सब्जियों में सबसे तेज वृद्धि दिखाई दे रही है, विशेषकर प्याज की कीमतें साल भर में दोगुनी हो गई हैं।
प्याज की कीमतों में असाधारण वृद्धि आंकड़ों में स्पष्ट दिख रही है। अगस्त में जहां प्याज की महंगाई 48.78 प्रतिशत थी, वहीं सितंबर में यह 108.09 प्रतिशत तक पहुंच गई। इस तेजी से कीमत वृद्धि का मुख्य कारण मानसून के कमजोर प्रदर्शन को माना जा रहा है।
कृषि मौसम को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। मानसून की कमजोरी और आने वाले महीनों में एल नीनो जैसे जलवायु घटकों के प्रभाव से फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति खाद्य पदार्थों की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है और कीमतें आगे भी बढ़ सकती हैं।
नीति निर्माताओं के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है। खाद्य मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है। सरकार और रिजर्व बैंक आने वाले समय में कीमतों के रुझानों पर नजर रखेंगे और आवश्यक उपाय करेंगे।