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वित्त वर्ष 2027 में भारत की वृद्धि 7 प्रतिशत से अधिक रहेगी: डीबीएस
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और उपभोक्ता मांग की अनिश्चितता के बावजूद भारत की आर्थिक गति को चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन पूरे वर्ष के लिए विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रहने की संभावना है।
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भारत की अर्थव्यवस्था वित्तीय वर्ष 2027 में दूसरी छमाही में कुछ मंदी के बावजूद 7 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर हासिल कर सकती है। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग संस्थान डीबीएस की विश्लेषक राधिका राव के विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकलता है।
राव के अनुसार, आने वाले महीनों में कई कारक भारत की आर्थिक गतिविधि पर दबाव डाल सकते हैं। वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल में वृद्धि हो सकती है, जबकि उत्पादन लागत में भी दबाव आ सकता है। इसके अलावा, उपभोक्ता मांग को लेकर बाजार में अनिश्चितता व्याप्त है।
हालांकि, दूसरी छमाही में इन चुनौतियों के बावजूद वर्ष भर की वृद्धि दर में कमी का अनुमान नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि पहली छमाही की मजबूत कार्यक्षमता पूरे वित्त वर्ष के लिए विकास दर को 7 प्रतिशत से ऊपर रख सकती है।
भारतीय अर्थव्यवस्था की लचीलापन और आंतरिक मांग की शक्ति इन बाहरी दबावों का मुकाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नीति निर्माता और व्यावसायिक जगत आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों को बनाए रखने के लिए सतर्क रहेंगे।