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सकल घरेलू उत्पाद की गणना को लेकर तरीकों में विवाद

भारत के 1.4 अरब लोगों की आर्थिक गतिविधियों को एक ही अंक में बदलने के लिए आधार वर्ष, मुद्रास्फीति समायोजन और विभिन्न पद्धतियों को लेकर विवाद जारी है। सकल घरेलू उत्पाद की गणना के तरीकों में मौलिक अंतर के कारण विश्लेषकों में असहमति बनी हुई है।

LSN India · 6 September 2026

सकल घरेलू उत्पाद की गणना को लेकर तरीकों में विवाद

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि को मापने के लिए सकल घरेलू उत्पाद एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है, लेकिन इसकी गणना की पद्धति को लेकर अर्थशास्त्रियों और नीति निर्माताओं के बीच गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ है। विवाद मुख्य रूप से आधार वर्ष के चयन, डिफ्लेटर्स के उपयोग और आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न समायोजनों से संबंधित है। ये तकनीकी निर्णय अंतिम सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों में काफी भिन्नता ला सकते हैं। भारत जैसी विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था में, जहां औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्र दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, डेटा संग्रहण और गणना की चुनौतियां और भी जटिल हो जाती हैं। विभिन्न आर्थिक हलकों में इस बात को लेकर बहस चल रही है कि कौन सी पद्धति देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को सबसे सटीक रूप से दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट और सुसंगत पद्धति का उपयोग आर्थिक नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।