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आठ साल में देश से 84,000 से अधिक स्कूल गायब हुए
भारत में सरकारी स्कूलों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। 2018-19 से 2025-26 के बीच सरकारी स्कूलों का हिस्सा 69.8 प्रतिशत से घटकर 68.54 प्रतिशत रह गया है।
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भारत की शिक्षा व्यवस्था में चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। पिछले आठ वर्षों में देश से 84,000 से अधिक स्कूल बंद हुए या समाप्त हुए हैं। यह आंकड़ा सरकारी और निजी शिक्षा प्रणाली के बीच बढ़ती असमानता को दर्शाता है।
सरकारी स्कूलों के नेटवर्क में लगातार संकुचन हो रहा है। 2018-19 में सरकारी स्कूलों की हिस्सेदारी कुल स्कूलों का 69.8 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में घटकर 68.54 प्रतिशत रह गई है। इसी अवधि में सरकार द्वारा अनुदानित स्कूलों की स्थिति और भी खराब हुई है, जहां उनका हिस्सा 5.46 प्रतिशत से घटकर 5.4 प्रतिशत पर आ गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की उपलब्धता को प्रभावित कर रही है। निजी स्कूलों की ओर रुझान बढ़ने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा में बाधा आ सकती है। सार्वजनिक शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है।
इस संकट को संबोधित करने के लिए सरकार को स्कूल बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाना और मौजूदा संस्थानों को बेहतर बनाना होगा। शिक्षा का अधिकार सभी भारतीय बच्चों के लिए सुनिश्चित करना राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए।