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पियूष गोयल ने यूरोप पर उठाए कार्बन उत्सर्जन के सवाल
भारत के वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल ने यूरोपीय संघ की कार्बन नीति पर तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि विकसित देश ऐतिहासिक प्रदूषण के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करने से बच रहे हैं।
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भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पियूष गोयल ने यूरोपीय संघ के कार्बन उत्सर्जन संबंधी रुख की तीव्र आलोचना की है। गोयल ने सवाल उठाया कि इस पर्यावरणीय संकट के लिए वास्तविक जिम्मेदारी किस पर है और विकसित राष्ट्रों को अपनी ऐतिहासिक जिम्मेदारियों को स्वीकार करना चाहिए।
गोयल की आलोचना का केंद्रीय बिंदु यूरोपीय संघ की कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) नीति है। इस तंत्र के तहत आयातित उत्पादों पर कार्बन शुल्क लगाया जाता है, जिससे विकासशील अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं।
भारत के मंत्री का कहना है कि यह नीति असंतुलित है और विकसित देशों को उनके दशकों के अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन के लिए जवाबदेह नहीं बनाती। उन्होंने तर्क दिया कि विकसित राष्ट्रों को अपनी औद्योगिक क्रांति के दौरान किए गए उत्सर्जन के लिए ऐतिहासिक दायित्व वहन करना चाहिए।
यह विवाद जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में विकसित और विकासशील देशों के बीच बढ़ते विभाजन को दर्शाता है। भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं मानती हैं कि विकसित देशों को अपने ऐतिहासिक कार्बन ऋण को कम करने में अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।