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भारत की आर्थिक वृद्धि अप्रैल-जून में घटकर 7.1% रह सकती है
एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने तेल की कीमतों में वृद्धि से जुड़े नए जोखिम खड़े हो गए हैं। भारत अपनी तेल खपत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है।
LSN India ·

भारत की आर्थिक वृद्धि दर अप्रैल से जून की तिमाही में घटकर 7.1 प्रतिशत रह सकती है। यह आकलन सर्वेक्षणों के आधार पर किया गया है जो भारतीय अर्थव्यवस्था की गति में संभावित मंदी की ओर इशारा करते हैं।
देश के आर्थिक विकास को लेकर चिंता का एक प्रमुख कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि है। वर्तमान में कच्चा तेल प्रति बैरल 90 डॉलर से अधिक की कीमत पर कारोबार कर रहा है और इसके और भी बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
भारत विश्व के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। देश अपनी कुल तेल खपत का 85 प्रतिशत से अधिक भाग अन्य देशों से आयात करता है। तेल की कीमतों में किसी भी उछाल का सीधा असर देश के आयात बिल, मुद्रास्फीति और समग्र आर्थिक विकास पर पड़ता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में स्थिरता न रहने से भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिविधियों पर तेल की कीमतों का प्रभाव देखा जा सकता है।