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सात साल में अमरूद उत्पादन 40% बढ़ा, लेकिन उपज में ठहराव
भारत में अमरूद का कुल उत्पादन पिछले सात वर्षों में 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से खेती योग्य क्षेत्र के विस्तार के कारण हुई है, जबकि प्रति हेक्टेयर उपज में कोई सार्थक सुधार नहीं आया है।
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भारत में अमरूद का कुल उत्पादन पिछले सात वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, लेकिन यह बढ़ोतरी मुख्यतः अधिक भूमि के तहत खेती से जुड़ी है। विस्तृत क्षेत्रों में फसल लगाए जाने के कारण कुल पैदावार में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हालांकि, उत्पादन में यह वृद्धि छिपी हुई चिंताओं को दर्शाती है। प्रति हेक्टेयर के आधार पर अमरूद की उपज लगभग 14.6 से 14.8 टन प्रति हेक्टेयर पर ठहरी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर किस्मों के विकास और बाग प्रबंधन तकनीकों में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा तरीकों से उपज में वृद्धि रुकी हुई है, जिससे उत्पादकता बढ़ाने के लिए नवीन दृष्टिकोण की जरूरत है। बेहतर बीज किस्मों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाने से न केवल प्रति हेक्टेयर पैदावार में वृद्धि हो सकती है, बल्कि किसानों की आय में भी सुधार संभव है।
कृषि अधिकारियों का कहना है कि सरकार इस क्षेत्र में किसानों को आधुनिक तकनीकें सिखाने और उन्नत किस्मों की बीज उपलब्ध कराने पर ध्यान दे रही है। इन प्रयासों से न केवल अमरूद की गुणवत्ता में सुधार आएगा, बल्कि किसानों के लिए अधिक लाभजनक खेती भी संभव होगी।