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विदेशी निवेश के लिए भारत का आह्वान, लेकिन अमेरिकी पूंजीपतियों को दिखती हैं बाधाएं
भारत ने निवेश संबंधी कुछ नियमों में छूट दी है, लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि विदेशी निवेशकों को क्षेत्रीय प्रतिबंध, पूंजी प्रवाह की सीमाएं और नियामकीय जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।
LSN India ·

भारत विदेशी पूंजी निवेश के लिए दरवाजा खोलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिकी निवेशकों का मानना है कि प्रवेश के रास्ते में अभी भी कई अवरोध बाकी हैं। एक ताजा अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने कुछ निवेश नियमों को ढीला किया है, लेकिन विदेशी पूंजीपतियों को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों के लिए सबसे बड़ी बाधा विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में प्रतिबंध हैं। इसके अलावा, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश पर निर्धारित सीमाएं भी निवेशकों के लिए समस्या बनी हुई हैं। आयात संबंधी नियम और नीतियां भी विदेशी कंपनियों के संचालन को प्रभावित करती हैं।
इसके अतिरिक्त, नियामकीय व्यवस्था में भ्रष्टाचार की संभावनाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। भारत के नियामकीय तंत्र में पारदर्शिता की कमी विदेशी निवेशकों के लिए जोखिम का कारण बनती है।
अमेरिकी हलकों में माना जा रहा है कि भारत ने हालांकि निवेश संबंधी कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर आकर्षणीय निवेश गंतव्य बनने के लिए अभी और सुधार की आवश्यकता है। अर्थनीति विकास की दृष्टि से अमेरिकी पूंजी का आकर्षण महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए व्यावहारिक बाधाओं को दूर करना होगा।